Obstetric grips
1-Fundal grip
इसे Leopold 1st maneuver भी कहते हैं इसके द्वारा गर्भस्थ शिशु की lie तथा presentation के बारे में जानकारी मिलती है।
Procedure
यह परीक्षण मरीजों के चेहरे का सामना करते हुए किया जाता है। उंगलियों की palmar surface के द्वारा फंडास वाले भाग का palpation किया जाता है तथा क्या पता लगाया जाता है कि शिशु का कौन सा pole fundus के ऊपरी भाग में स्थित है।
Findings
*यदि fundus वाले भाग में round hard smooth भाग महसूस होता है तो यहां fundus वाले भाग में उपस्थिति दर्शाता है अर्थात इसे स्पष्ट होता है कि शिशु का presentation breech तथा lie longitudinal है।
*यहां fundus वाले भाग में नियमित रूप से चौड़ा तथा कोमल भाग feel होता है तो यहां cephalic presentation को इंगित करता है lie ऐसी स्थिति में भी longitudinal होगी।
*यदि fundus मैं उक्त दोनों में से कोई भी भाग feel नहीं होता है तो यह transerse lie की उपस्थिति को इंगित करता है।
2-Lateral grip
इसे umbilical grip or Leopold second maneuver भी कहते हैं इस परीक्षण के द्वारा शिशु की back limb or anterior shoulder की position के बारे में जानकारी मिलती है।
Procedure
Pelvic grip की तरह यह परीक्षण भी गर्भवती महिला के चेहरे का सामना करते हुए किया जाता है examiner अपने हाथ नाभि के भाषण में दोनों तरफ एक-एक रख देता है अब पहले एक हाथ द्वारा abdomen की midline से एक साइड में symphysis pubis से लेकर fundus तक palpation किया जाता है तथा यह पता लगाया जाता है कि इस भाग में शिशु का कौन सा भाग मौजूद है इसके बाद दूसरे हाथ के द्वारा भी इसी तरह abdomen की midline से दूसरी साइड में symphysis pubis से लेकर fundus तक के स्थान को palpate किया जाता है।
Findings
*Smooth curved or resistant भाग की उपस्थिति शिशु की पीठ को इंगित करती है यह back महिला के abdomen के दाएं से बाएं तरफ उपस्थित है इस आधार पर शिशु की longitudinal lie मैं position का पता लगता है।
*खाली तथा अनियमित आकार की अंगों की उपस्थिति शिशु के limbs को इंगित करती है शिशु के limbs उसके back की opposite side मैं feel होने चाहिए।
*यदि lie लंबाई तथा presentation cephalic है तो shoulder uterus के निचले भाग में सिर से थोड़ा ऊभार के रूप में feel होता है इनकी स्थिति abdominal wall के करीब या अधिक दूर हो सकती है
3-Pawlik,s grips
इसे second pelvic grip या Leopold third maneuver जी कहते हैं इस परीक्षण के द्वारा शिशु का presenting part तथा सिर के engagement के बारे में जानकारी मिलती है।
Procedure
यह palpation भी pregnant womenके चेहरे का सामना करते हुए किया जाता है गर्भवती महिला की टांगों को घुटनों पर से मोड़ दिया जाता है ताकि परीक्षण के दौरान उसे परेशानी ना हो अब examiner अपने दाएं हाथ के पहले हुए अंगूठे तथा अंगुलियों की सहायता से uterus के lower pole को palpate करता है तथा यह पता लगाता है कि uterus के lower pole मैं शिशु का कौन सा भाग मौजूद है।
Findings
*यदि presenting part का engagement नहीं हुआ है तो palpation के दौरान examiner को movable mass महसूस होता है।
*यदि presenting part foetus तासीर है तथा इसका पेल्विस में engagement हो चुका है तो examiner कोई भी movable mas feel नहीं होता है।
*Transverse lie के दौरान यहां grip खाली होती है।
First pelvic grip
इसे Leopold 4th maneuver भी कहते हैं इस grip के द्वारा शिशु के presenting part attitude तथा सिर के engagement के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।
Procedure
यह परीक्षण गर्भवती महिला के पैरों का सामना करते हुए किया जाता है यह palpation केवल हाथों की उंगली द्वारा किया जाता है दोनों हाथों की उंगलियां abdomen middle line के दोनों तरफ uterus lower poleपर या नबी के स्तर से थोड़ा नीचे रख दी जाती है मूल्यों को नीचे की ओर तथा फिर वापस ऊपर की और हल्का सा दाग लगाते हुए इस खाते हुए ले जाते हैं इस प्रकार palpation के द्वारा यह पता लगाया जाता है कि शिशु का कौन सा भाग uterus lower pole मैं स्थित है यदि यहां सिर है तो फिर शिशु के presenting part attitude or engagement के बारे में भी पता किया जाता है।
Findings
*यदि palpation के दौरान round hard or smooth feel होता है तो यहां cephalic presentation को इंगित करता है।
*अब presenting part का पता लगाने के लिए cephalic prominence को ध्यान पूर्वक palpate किया जाता है तथा इसका limb or back के साथ संबंध देखा जाता है यदि cephalic prominence उसी side मैं स्थित होता है जिस साइड में limbs स्थित है तो यह vertex presentation को इंगित करता है इसके विपरीत यदि cephalic prominence शिशु की पीठ की तरह स्थित है तो यहां face presentation को इंगित करता है vertex presentation वाली स्थिति में cephalic prominent Sinciput होता है तथा सिर welflex है इसके विपरीत face presentation वाली स्थिति में cephalic prominence occiput होता है तथा सिर extend होता है।
*Foetus के attitude का पता लगाने के लिए सिर के sincipital or occipital ध्रुवों की स्थिति assess की जाती है यदि head का sincipital poll, occipital pole की तुलना में थोड़ा ऊंचे स्तर पर स्थित है तू यहां इस स्थिति में head का attitude well flexed होता है यदि head के उक्त दोनों Pol एक ही level पर स्थित है तो इस स्थिति में headache का attitude deflexed होता है।
*Foetus के सिर के engagement का पता लगाने के लिए अंगुलियों के द्वारा fetal head को palpate किया जाता है यदि palpation के दौरान examiner द्वारा अंगुलियों को lower abdomenकी ओर ले जाते समय दोनों हाथों की उंगलियों एक-दूसरे के विपरीत दिशा में जाती हैं अर्थात उंगलियों का divergence होता है तो यह palpation यह इंगित करता है कि fetal head का engagement हो गया है।
इसके विपरीत foetus के सिर के side को palpate करते समय दोनों हाथों की उंगलियां एक दूसरे के नजदीक आती है अर्थात fingers का convergence होता है तो यहां palpation यह इंगित करता है कि शिशु के सिर का engagement नहीं हुआ है।
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