Antenatal advice
Pregnancyके दौरान महिला को प्रसव के लिए शारीरिक मानसिक तथा भावनात्मक रूप से तैयार करने के लिए उसे उचित पैसा पूर्ण सलाह देना अति आवश्यक है।जैसे-जैसे गर्भावस्था की अवधि बढ़ती जाती है गर्भवती महिला में अनेक शारीरिक परिवर्तन दिखाई देना प्रारंभ हो जाते हैं जो कि महिला की जीवन शैल में परिवर्तन ला सकते हैं।बढ़ते हुए शिशु की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति गर्भवती महिला के रक्त परिसंचरण तंत्र द्वारा ही होती है इस प्रकार महिला की कई आधारभूत आवश्यकताएं भी बढ़ जाती है।इन सबके अलावा शिशु के जन्म तथा उसके पालन पोषण संबंधी अनेक शंकाएं भी महिला में मौजूद हो सकती है इस प्रकार स्पष्ट है कि गर्भावस्था के दौरान महिला को शारीरिक मानसिक तथा मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूत बनाना अति आवश्यक होता है। और यही antenatal advice का मुख्य उद्देश्य है।
Element of antenatal care
1-Diet supplementary
*Pregnancy के दौरान महिला को अपनी सामान्य diet से अधिक diet लेने की सलाह देनी चाहिए।
*Pregnancy के दौरान महिला को प्रतिदिन 300 कैलोरी अतिरिक्त लेनी चाहिए साथ ही महिला को यह समझना चाहिए कि या बढ़ती हुई मात्रा उसके शिशु की आवश्यकता की पूर्ति हेतु लेना अति आवश्यक है साथ ही postpartum periodके दौरान महिला को प्रतिदिन 500 किलो कैलोरी ऊर्जा अतिरिक्त लेने की सलाह देनी चाहिए या बड़ी हुई मात्रा सफल lactation के लिए आवश्यक होती हैं ।
*महिला के आहार में प्रोटीन आयरन कैल्शियम विटामिन ए विटामिन सी आदि पोषक पदार्थों की भरपूर मात्रा होनी चाहिए।
*महिला की आहार में निर्मित पदार्थ प्रचुर मात्रा में होने चाहिए।
*दूध एवं दूध से निर्मित खाद पदार्थ जैसे पनीर दही आदि।
*हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक मेथी आदि।
*अन्य सब्जियां
*हरी सब्जियां
*विभिन्न प्रकार के फल जैसे सेब संतरा अमरूद आदि।
*डार्लिंग अंडे गुड।
*मांस मछली।
*Pregnancy के दौरान लिए जाने वाला हार हल्का पोषण तथा आसानी से पचने वाला होना चाहिए।
*Pregnant womenके परिवार के अन्य सदस्य जो कि यह निर्णय लेते हैं कि घर में कौन से खाद्य पदार्थ लेकर आने हैं यह गर्भवती महिला को खाने में क्या देना है उन सदस्यों को भी विशेष रूप से counsellingदी जानी चाहिए उन्हें यह भी बताना चाहिए कि स्वस्थ शिशु के जन्म तथा सामान्य प्रसव हेतु महिला को पर्याप्त पोषण देना अति आवश्यक है।
*Pregnant womenको भोजन के 1 घंटे बाद तक चाय कॉफी या दूध का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह खाद पदार्थ भोजन से आयरन के absorption को प्रभावित करते हैं।
*Pregnant womenके भोजन में विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ जैसे नींबू आमला संतरा आदि पर्याप्त मात्रा में होने चाहिए क्योंकि यह भोजन से आयरन के absorption को बढ़ाते हैं।
*Pregnant womenको आहार संबंधी सलाह देते समय उसकी सामाजिक आर्थिक स्थिति धार्मिक विश्वास स्वाद आहार संबंधी आदतें हार्दिक को भी दिमाग में रखना चाहिए।
*स्थानीय खाद पदार्थों को आहार में प्राथमिकता देनी चाहिए।
*Pregnant women तथा उसके परिजनों में पाई जाने वाली आर संबंधी मिथ्या धारणाएंगर्भवती महिला के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है अतः इन मिथ्या भावना को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।
*Pregnant women क्या हार में fibres अब आप मात्रा में होने चाहिए।
2-Rest and sleep
*Pregnant women को प्रतिदिन लगभग 8 से 10 घंटे आराम करने की सलाह देनी चाहिए।
*सोते समय lateral position ज्यादा सुविधाजनक रहती है।
*गर्भवती महिला को सोते समय left lateral position धारण करने की सलाह देनी चाहिए।
3-Breast care
*गर्भावस्था के दौरान breast size बढ़ जाता है अतः गर्भवती महिला के breast को पर्याप्त सहारा देने के लिए अच्छी फिटिंग वाली ब्रा पहननी चाहिए।
*यदि nipple flatहो या अंदर की तरफ मुड़े हुए हो तो गर्भवती महिला को धीरे धीरे इन्हें बाहर की तरफ खींचने की सलाह देनी चाहिए।
*Pregnant women मैं गर्भावस्था के 12 सप्ताह बाद से colostrum का secretionहोना प्रारंभ हो जाता है अतः इस colostrum में अवशोषण हेतु गर्भवती महिला को ब्रा के अंदर pad लगाने की सलाह दी जाती है।
या ped ब्रा तथा बाहरी कपड़ों को गीला होने से बचाता है जब pad पूरी तरह से गिला हो जाए तो इसे बदल देना चाहिए।
4-Breastfeeding
शिशु को सामान्य प्रसव की स्थिति में आधा घंटे के अंदर तथा सिजेरियन की स्थिति में दो से 4 घंटे के अंदर स्तनपान करवाना प्रारंभ कर देना चाहिए। क्योंकि इस दौरान शिशु के स्तनपान के लिए आवश्यक sucking or rooting reflex बहुत strong होते हैं। जो कि स्तनपान की प्रक्रिया को बहुत आसान बना देते हैं।
5-Immunization of TT
*प्रत्येक गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान टीटी के दो टीके लगवाने चाहिए यह टीके माता तथा उसके नवजात को titness से बचाते हैं।
*TT का पहला टीका प्रेगनेंसी के 16 से 24 सप्ताह की अवधि के दौरान दिया जाता है तथा दूसरा टीका पहले के ठीक एक माह पश्चात लगाया जाता है।
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